ऑटिज्म – भाग 2 ऑटिज्म क्यों होता है?
कारण, जोखिम कारक और वैक्सीन से जुड़े वैज्ञानिक तथ्य
Dr. Anand Nagdeve
7/31/20261 min read


आखिर ऑटिज्म होता क्यों है?
यह शायद सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल है।
जब किसी माता-पिता को पता चलता है कि उनके बच्चे को ऑटिज्म है, तो सबसे पहले उनके मन में यही सवाल आता है—
"डॉक्टर साहब, आखिर ऐसा हुआ क्यों?"
फिर एक के बाद एक कई सवाल शुरू हो जाते हैं।
"क्या गर्भावस्था में हमसे कोई गलती हुई थी?"
"क्या हमने बच्चे की सही देखभाल नहीं की?"
"क्या किसी वैक्सीन की वजह से ऐसा हुआ?"
"क्या मोबाइल या टीवी इसकी वजह है?"
मैं आपको सबसे पहले एक बात साफ़-साफ़ कहना चाहता हूँ।
आज तक विज्ञान ने ऐसा कोई एक कारण नहीं खोजा है, जिससे यह कहा जा सके कि 'यही वजह है जिससे ऑटिज्म होता है।'
ऑटिज्म किसी एक कारण से होने वाली बीमारी नहीं है। यह कई जैविक (Biological), आनुवंशिक (Genetic) और कुछ पर्यावरणीय (Environmental) कारकों के मिलकर प्रभाव डालने से होने वाली न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है।
इसलिए सबसे पहले अपने मन से यह बात निकाल दीजिए कि "यह हमारी गलती से हुआ है।" अधिकांश मामलों में ऐसा बिल्कुल नहीं होता।
क्या ऑटिज्म जन्म के बाद होता है?
नहीं।
आज उपलब्ध वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि ऑटिज्म की शुरुआत बच्चे के जन्म के बाद नहीं होती, बल्कि मस्तिष्क के विकास के दौरान, यानी गर्भावस्था में ही उसके आधार बनने लगते हैं।
जब बच्चा माँ के गर्भ में होता है, तब उसका मस्तिष्क बहुत तेज़ी से विकसित होता है। अरबों तंत्रिका कोशिकाएँ (Neurons) बनती हैं और उनके बीच लाखों-करोड़ों कनेक्शन विकसित होते हैं।
यदि इस विकास की प्रक्रिया में कुछ जैविक परिवर्तन होते हैं, तो आगे चलकर बच्चे के सामाजिक व्यवहार, भाषा और सीखने के तरीके पर असर पड़ सकता है।
इसका मतलब यह नहीं कि गर्भावस्था में किसी एक घटना की वजह से ऑटिज्म हो गया। यह एक बहुत जटिल प्रक्रिया है, जिसे विज्ञान अभी भी पूरी तरह समझने की कोशिश कर रहा है।
क्या ऑटिज्म आनुवंशिक (Genetic) होता है?
हाँ, वर्तमान समय में ऑटिज्म का सबसे बड़ा कारण आनुवंशिक माना जाता है।
पिछले कई वर्षों में दुनिया भर में हजारों बच्चों पर रिसर्च की गई है। इन अध्ययनों से पता चला है कि ऑटिज्म में जेनेटिक्स की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।
लेकिन यहाँ एक बात समझना ज़रूरी है।
बहुत से माता-पिता पूछते हैं—
"डॉक्टर साहब, कौन-सा जीन खराब हो जाता है?"
असल में ऐसा कोई एक जीन नहीं है जो ऑटिज्म का कारण बनता हो।
आज वैज्ञानिक ऐसे सैकड़ों जीन पहचान चुके हैं, जिनमें बदलाव होने पर ऑटिज्म का जोखिम बढ़ सकता है। कई बार कई जीन मिलकर प्रभाव डालते हैं और कुछ बच्चों में नया जीन परिवर्तन (De novo mutation) भी पाया जाता है।
यानी ऑटिज्म एक Polygenic Condition है, किसी एक जीन की बीमारी नहीं।
अगर परिवार में पहले से ऑटिज्म है तो क्या दूसरे बच्चे में भी हो सकता है?
हाँ, संभावना सामान्य बच्चों की तुलना में बढ़ जाती है।
यदि परिवार में पहले से एक बच्चा ऑटिज्म से प्रभावित है, तो अगले बच्चे में भी जोखिम सामान्य आबादी की तुलना में अधिक रहता है।
लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हर अगला बच्चा ऑटिज्म से प्रभावित होगा।
इसका केवल इतना अर्थ है कि ऐसे बच्चों के विकास पर शुरू से थोड़ा अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
किन बच्चों में ऑटिज्म होने की संभावना ज़्यादा रहती है?
कुछ परिस्थितियों में जोखिम सामान्य से थोड़ा अधिक देखा गया है।
1. लड़कों में
ऑटिज्म लड़कियों की तुलना में लड़कों में लगभग चार गुना अधिक पाया जाता है।
हालाँकि अब वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि कई लड़कियों में लक्षण हल्के होने के कारण उनका निदान देर से हो पाता है।
2. परिवार में पहले से ऑटिज्म होना
यदि परिवार में किसी भाई-बहन को ऑटिज्म है, तो जोखिम कुछ बढ़ जाता है।
3. कुछ आनुवंशिक सिंड्रोम
जैसे—
Fragile X Syndrome
Tuberous Sclerosis
Rett Syndrome
इन बच्चों में ऑटिज्म का जोखिम सामान्य से अधिक पाया जाता है।
क्या गर्भावस्था के दौरान कुछ कारण जोखिम बढ़ा सकते हैं?
हाँ।
लेकिन यहाँ एक बात हमेशा याद रखिए।
जोखिम बढ़ना और कारण होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
कुछ परिस्थितियों में ऑटिज्म का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन परिस्थितियों में हर बच्चे को ऑटिज्म होगा।
रिसर्च में जिन कारकों का उल्लेख मिलता है, उनमें शामिल हैं—
गर्भावस्था में अनियंत्रित मधुमेह
गर्भावस्था के दौरान गंभीर मोटापा
समय से पहले (Premature) जन्म
जन्म के समय बहुत कम वजन
माता-पिता की अधिक आयु
गर्भावस्था में कुछ विशेष दवाओं (जैसे Valproate) का उपयोग
कुछ विशेष संक्रमण
इनमें से कोई भी कारण अकेले ऑटिज्म होने की गारंटी नहीं देता।
क्या मोबाइल या टीवी देखने से ऑटिज्म होता है?
यह सवाल आजकल बहुत पूछा जाता है।
इसका जवाब है—नहीं।
अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि मोबाइल, टीवी, वाई-फाई या मोबाइल टावर की रेडिएशन से ऑटिज्म होता है।
हाँ, बहुत अधिक स्क्रीन टाइम बच्चों में भाषा के विकास, ध्यान और सामाजिक संपर्क को प्रभावित कर सकता है।
ऐसे बच्चे देर से बोल सकते हैं या लोगों से कम बातचीत कर सकते हैं, जिससे कई बार माता-पिता को ऑटिज्म जैसा भ्रम हो जाता है।
लेकिन स्क्रीन टाइम ऑटिज्म का कारण नहीं है।
क्या खाने-पीने की वजह से ऑटिज्म होता है?
नहीं।
आज तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि चीनी, दूध, चॉकलेट, गेहूँ या किसी एक विशेष भोजन से ऑटिज्म होता है।
इंटरनेट पर कई तरह की डाइट बताई जाती हैं, लेकिन हर बच्चे के लिए उनका कोई वैज्ञानिक लाभ सिद्ध नहीं हुआ है।
इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चे का सामान्य भोजन बंद करना सही नहीं है।
क्या पर्यावरण (Environment) की कोई भूमिका है?
इस विषय पर अभी भी रिसर्च चल रही है।
कुछ अध्ययनों में वायु प्रदूषण, कुछ औद्योगिक रसायनों और गर्भावस्था के दौरान कुछ विषैले पदार्थों के संपर्क को जोखिम बढ़ाने वाला माना गया है।
लेकिन अभी तक ऐसा कोई पर्यावरणीय कारण नहीं मिला है जिसे निश्चित रूप से ऑटिज्म का कारण कहा जा सके।
सबसे बड़ा सवाल — क्या वैक्सीन से ऑटिज्म होता है?
अगर मुझे पूरे ब्लॉग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा चुनना हो, तो मैं यही चुनूँगा।
क्योंकि आज भी बहुत से माता-पिता इस बात को लेकर डरते हैं।
इसका जवाब बिल्कुल स्पष्ट है—नहीं।
वैक्सीन से ऑटिज्म नहीं होता।
यह केवल मेरी राय नहीं है।
यह दुनिया के लाखों बच्चों पर किए गए वैज्ञानिक अध्ययनों का निष्कर्ष है।
यह भ्रम शुरू कैसे हुआ?
सन् 1998 में एक डॉक्टर Andrew Wakefield ने एक छोटा-सा अध्ययन प्रकाशित किया, जिसमें MMR वैक्सीन और ऑटिज्म के बीच संबंध होने का दावा किया गया।
बाद में जाँच में पता चला कि उस अध्ययन में गंभीर वैज्ञानिक और नैतिक गड़बड़ियाँ थीं।
वह शोध-पत्र वापस ले लिया गया।
लेखक का मेडिकल लाइसेंस रद्द कर दिया गया।
पूरी दुनिया के वैज्ञानिक समुदाय ने उस अध्ययन को अस्वीकार कर दिया।
इसके बाद लाखों बच्चों पर बड़े-बड़े अध्ययन किए गए।
हर बार एक ही निष्कर्ष सामने आया—
MMR सहित किसी भी नियमित बचपन के टीके और ऑटिज्म के बीच कोई कारणात्मक संबंध नहीं है।
आज WHO, CDC, American Academy of Pediatrics और दुनिया की लगभग सभी प्रमुख स्वास्थ्य संस्थाएँ यही कहती हैं।
इसलिए यदि कोई आपको कहे कि "टीका लगवाने से ऑटिज्म हो गया", तो समझिए कि वह वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर बात नहीं कर रहा है।
क्या माता-पिता की परवरिश इसकी वजह होती है?
बिल्कुल नहीं।
कई साल पहले एक गलत धारणा थी कि माँ का बच्चे से कम लगाव ऑटिज्म का कारण बनता है।
आज यह सिद्धांत पूरी तरह गलत साबित हो चुका है।
ऑटिज्म का माता-पिता के प्यार, अनुशासन या परवरिश से कोई संबंध नहीं है।
इसलिए खुद को दोष देना बंद कीजिए।
आखिर गलती कहाँ हुई?
"गलती ढूँढने में समय मत लगाइए, बच्चे की मदद करने में समय लगाइए।"
ऑटिज्म किसी की गलती नहीं है।
यह न तो किसी टीके से होता है, न किसी एक खाने से और न ही माता-पिता की परवरिश से।
आज हमारे पास सबसे बड़ा हथियार है—जल्दी पहचान और सही समय पर शुरू की गई थेरेपी।
जितनी जल्दी हम बच्चे की ज़रूरतों को समझेंगे, उतना ही बेहतर उसके विकास में मदद कर पाएँगे।
अगले भाग में...
अब तक हमने समझा कि ऑटिज्म क्यों होता है और किन बातों को लेकर फैली हुई धारणाएँ सही नहीं हैं।
भाग–3 में हम विस्तार से जानेंगे—
ऑटिज्म का डायग्नोसिस कैसे किया जाता है?
M-CHAT क्या है?
क्या कोई ब्लड टेस्ट या MRI से ऑटिज्म पता चलता है?
इलाज और थेरेपी कैसे काम करती हैं?
क्या ऑटिज्म वाला बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है?
और माता-पिता अपने बच्चे की सबसे अच्छी मदद कैसे कर सकते हैं?
References:
Developmental Pediatrics: CDC Kerala Experience. Second Edition. Author: Prof. (Dr.) M. K. C. Nair, D.Sc. Child Development Centre (CDC), Kerala.
American Psychiatric Association (APA). Diagnostic and Statistical Manual of Mental Disorders (DSM-5-TR). 5th Edition, Text Revision, American Psychiatric Publishing, 2022. DSM-5-TR वर्तमान में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के निदान के प्रमुख मानकों में से एक है।
World Health Organization (WHO). International Classification of Diseases, 11th Revision (ICD-11). ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के अंतरराष्ट्रीय निदान मानदंड।
Indian Academy of Pediatrics (IAP). Consensus Statement on Evaluation and Management of Autism Spectrum Disorder. Indian Pediatrics. 2017;54:385–393. (Samir Dalwai, MKC Nair एवं सहयोगी)। भारत में ऑटिज्म के मूल्यांकन और प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश।
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