नवजात शिशु में पीलिया
माता-पिता के सबसे आम सवाल और उनके सरल जवाब
Dr. Anand Nagdeve
7/30/20261 min read


हम बात करेंगे एक ऐसे विषय की, जो लगभग हर नए माता-पिता को कभी न कभी चिंता में डाल देता है—नवजात शिशु का पीलिया (Newborn Jaundice)।
अगर आपके बच्चे को जन्म के 2–3 दिन बाद हल्का पीलापन दिखाई दे, तो हर बार घबराने की जरूरत नहीं होती।
लगभग 60% पूर्ण अवधि (Term) के नवजात और 80% समय से पहले जन्मे (Preterm) बच्चों में जीवन के पहले सप्ताह में कुछ न कुछ पीलिया होता है। यह अधिकतर फिजियोलॉजिकल जॉन्डिस होता है, यानी शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया।
इसी वजह से दुनिया भर में NICU में भर्ती होने के सबसे सामान्य कारणों में नवजात पीलिया भी शामिल है।
जब बच्चा अस्पताल में भर्ती होता है, तब भी कई प्रश्न होते हैं। फोटोथेरेपी के दौरान नए सवाल सामने आते हैं। डिस्चार्ज के समय माता-पिता की चिंताएँ कुछ और होती हैं, और घर जाने के बाद भी उनके मन में कई शंकाएँ बनी रहती हैं।
इसीलिए इस ब्लॉग का तरीका थोड़ा अलग होगा। इसमें मैं वही सवाल आपके सामने रखूँगा, जो मुझे रोज़मर्रा की प्रैक्टिस में सबसे अधिक सुनने को मिलते हैं, और फिर उन्हीं सवालों के माध्यम से उनके वैज्ञानिक, लेकिन सरल और व्यावहारिक उत्तर देने की कोशिश करूँगा।
मेरा प्रयास रहेगा कि नवजात शिशु में होने वाले फिजियोलॉजिकल जॉन्डिस (Physiological Jaundice) को चिकित्सा की कठिन भाषा में नहीं, बल्कि ऐसी सरल हिंदी में समझाऊँ जिसे हर अभिभावक आसानी से समझ सके। यदि इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद आपके मन के अधिकांश सवालों के जवाब मिल जाएँ और पीलिया को लेकर आपका डर कम हो जाए, तो मेरा यह प्रयास सफल माना जाएगा।
आखिर पीलिया होता क्यों है?
जब बच्चा माँ के पेट से बाहर आता है, तो उसके शरीर में मौजूद पुराने लाल रक्त कण (RBCs) तेजी से टूटते हैं।
इनसे बिलीरुबिन (Bilirubin) बनता है।
नवजात का लीवर अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं होता, इसलिए शुरुआत के दिनों में वह बिलीरुबिन को उतनी तेजी से बाहर नहीं निकाल पाता।
इसी कारण त्वचा और आँखों में पीलापन दिखाई देता है।
किन बच्चों में खतरा ज्यादा होता है?
कुछ बच्चों में बिलीरुबिन तेजी से बढ़ सकता है—
समय से पहले जन्मे बच्चे (Premature babies)
जन्म के समय वजन कम होना
स्तनपान ठीक से न होना
जन्म के पहले 24 घंटे में पीलिया दिखाई देना
पिछले बच्चे को गंभीर पीलिया या फोटोथेरेपी की जरूरत पड़ी हो
बच्चे को जन्म के समय चोट या सिर पर सूजन (Cephalhematoma)
संक्रमण (Sepsis)
G6PD की कमी जैसी कुछ आनुवंशिक स्थितियाँ
माता पिता के ब्लड ग्रुप का और बच्चे के ब्लड ग्रुप का पीलिया पर क्या प्रभाव पड़ता है?
यह बात बहुत महत्वपूर्ण है।
पहला—ABO Incompatibility
यदि माँ का ब्लड ग्रुप O है और बच्चे का A या B है, तो माँ की एंटीबॉडी बच्चे की लाल रक्त कोशिकाओं को तोड़ सकती हैं।
इससे बिलीरुबिन जल्दी बढ़ सकता है।
दूसरा—Rh Incompatibility
यदि माँ Rh Negative है और बच्चा Rh Positive है, तो कुछ परिस्थितियों में बच्चे में गंभीर हीमोलिसिस हो सकता है।
हालाँकि आजकल गर्भावस्था के दौरान Anti-D Injection मिलने से इसका खतरा काफी कम हो गया है।
यानी हर O ग्रुप या Rh नेगेटिव माँ के बच्चे को गंभीर पीलिया होगा—ऐसा बिल्कुल नहीं है, लेकिन ऐसे बच्चों पर डॉक्टर विशेष निगरानी रखते हैं।
फोटोथेरेपी कब लगती है?
बहुत से माता-पिता पूछते हैं—
"डॉक्टर साहब, बिलीरुबिन कितना होने पर लाइट लगती है?"
सच यह है कि केवल बिलीरुबिन की संख्या देखकर निर्णय नहीं लिया जाता।
डॉक्टर इन सभी बातों को देखते हैं—
बच्चे की उम्र कितने घंटे की है
बच्चा समय पर पैदा हुआ या प्रीमैच्योर
वजन कितना है
कोई अन्य बीमारी है या नहीं
बिलीरुबिन कितनी तेजी से बढ़ रहा है
इसी आधार पर तय किया जाता है कि फोटोथेरेपी की जरूरत है या नहीं।
फोटोथेरेपी कैसे काम करती है?
नीली रोशनी बिलीरुबिन को ऐसे रूप में बदल देती है जिसे बच्चा बिना लीवर की अतिरिक्त प्रक्रिया के पेशाब और मल के रास्ते बाहर निकाल सकता है।
यह एक सुरक्षित और प्रभावी उपचार है।
फोटोथेरेपी सुरक्षित है?
हाँ, बिल्कुल।
फोटोथेरेपी पिछले कई दशकों से पूरी दुनिया में सुरक्षित और प्रभावी उपचार के रूप में इस्तेमाल की जा रही है।
यह कोई "गरम लाइट" नहीं होती, बल्कि विशेष नीली रोशनी होती है, जो बिलीरुबिन को शरीर से बाहर निकलने योग्य बना देती है।
एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन कब करना पड़ता है?
बहुत कम बच्चों में इसकी जरूरत पड़ती है।
यदि—
बिलीरुबिन बहुत तेजी से बढ़ रहा हो,
फोटोथेरेपी के बावजूद कम न हो,
या बच्चे में दिमाग पर असर (Acute Bilirubin Encephalopathy) का खतरा हो,
तब डॉक्टर Exchange Transfusion करते हैं, जिसमें बच्चे का थोड़ा-थोड़ा रक्त निकालकर नया रक्त दिया जाता है ताकि बिलीरुबिन और हानिकारक एंटीबॉडी कम हो जाएँ।
आज समय पर जांच और फोटोथेरेपी मिलने के कारण इसकी जरूरत पहले की तुलना में काफी कम हो गई है।
क्या अगली बार भी यही समस्या होगी?
हाँ, कुछ परिवारों में दोबारा होने की संभावना ज्यादा रहती है।
यदि—
पहले बच्चे को गंभीर पीलिया हुआ था,
एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ी थी,
G6PD Deficiency हो,
ABO या Rh Incompatibility हो,
तो अगली गर्भावस्था या अगले बच्चे में भी डॉक्टर जन्म के तुरंत बाद बिलीरुबिन की विशेष निगरानी करते हैं
क्या मुझसे गर्भावस्था या बच्चे की देखभाल में कोई गलती हो गई?
नहीं।
यह शायद सबसे आम और सबसे भावुक सवाल होता है, खासकर माताओं का।
फिजियोलॉजिकल जॉन्डिस आपकी किसी गलती की वजह से नहीं होता। इसका कारण बच्चे का विकसित होता हुआ लीवर और जन्म के बाद लाल रक्त कोशिकाओं का सामान्य रूप से टूटना है।
इसलिए अपने आपको दोष बिल्कुल न दें।
क्या मेरे बच्चे को कोई इन्फेक्शन हो गया है?
हरगिज़ नहीं।
नवजात में होने वाला सामान्य पीलिया और संक्रमण की वजह से होने वाला पीलिया अलग-अलग बातें हैं।
अधिकांश बच्चों में पीलिया इन्फेक्शन की वजह से नहीं, बल्कि शरीर की सामान्य प्रक्रिया के कारण होता है।
हाँ, यदि बच्चे को बुखार हो, दूध न पी रहा हो, बहुत सुस्त हो या डॉक्टर को संक्रमण का संदेह हो, तब अलग से जाँच की जाती है।
क्या इससे आँखों की रोशनी कम हो जाएगी?
सामान्य पीलिया से आँखों की रोशनी पर कोई असर नहीं पड़ता।
आँखों का पीला दिखाई देना केवल बिलीरुबिन जमा होने की वजह से होता है। जैसे-जैसे बिलीरुबिन कम होता है, आँखों का रंग भी सामान्य हो जाता है।
क्या मेरे बच्चे का दिमाग या भविष्य प्रभावित होगा?
यदि पीलिया समय पर पहचान लिया जाए और उचित इलाज मिल जाए, तो अधिकांश बच्चों में भविष्य पूरी तरह सामान्य रहता है।
समस्या केवल तब होती है जब बिलीरुबिन बहुत अधिक बढ़ जाए और लंबे समय तक बिना इलाज के रहे।
इसीलिए समय पर जाँच और जरूरत पड़ने पर फोटोथेरेपी बहुत महत्वपूर्ण है।
डिस्चार्ज के बाद क्या पीलिया फिर से हो सकता है?
हाँ, कुछ बच्चों में बिलीरुबिन दोबारा थोड़ा बढ़ सकता है। इसे रीबाउंड जॉन्डिस (Rebound Jaundice) कहते हैं।
लेकिन हर बच्चे में ऐसा नहीं होता।
यदि डॉक्टर ने डिस्चार्ज दिया है, तो इसका मतलब है कि बच्चे की स्थिति सुरक्षित है। कुछ बच्चों को केवल दोबारा बिलीरुबिन की जाँच के लिए बुलाया जाता है।
घर जाने के बाद हमें क्या करना चाहिए?
बच्चे को बार-बार स्तनपान कराएँ।
बच्चा ठीक से दूध पी रहा है या नहीं, इस पर ध्यान दें।
बच्चा बहुत सुस्त लगे या दूध पीना छोड़ दे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
डॉक्टर ने यदि दोबारा बिलीरुबिन की जाँच के लिए बुलाया है, तो उसे बिल्कुल न टालें।
क्या धूप दिखाने से पीलिया ठीक हो जाता है?
यह सबसे आम गलतफहमियों में से एक है।
हल्की धूप से कुछ लाभ हो सकता है, लेकिन यह फोटोथेरेपी का विकल्प नहीं है।
यदि डॉक्टर ने फोटोथेरेपी की सलाह दी है, तो केवल धूप के भरोसे इलाज करना सुरक्षित नहीं है।
घर जाने के बाद क्या बच्चे को धूप दिखानी चाहिए?
हाँ, यदि आपका बच्चा स्वस्थ है, डॉक्टर ने उसे घर भेज दिया है और किसी विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं बताई है, तो सुबह की हल्की, सुरक्षित धूप कुछ समय के लिए दिखाने में सामान्यतः कोई नुकसान नहीं है। लेकिन इसे इलाज नहीं, बल्कि सामान्य देखभाल का एक हिस्सा समझिए।
यदि धूप दिखाएँ, तो इन बातों का ध्यान रखें—
सुबह की हल्की धूप (लगभग 8 से 9:30 बजे तक) ही बेहतर रहती है।
बच्चे को 5–10 मिनट तक ही धूप में रखें। बहुत देर तक धूप में न रखें।
तेज़ दोपहर की धूप से बिल्कुल बचें।
धूप दिखाते समय बच्चे को गर्मी न लगे और न ही शरीर का तापमान बढ़ने पाए।
बच्चे की आँखों पर सीधे तेज़ धूप न पड़े।
धूप दिखाने के बाद बच्चे को अच्छी तरह स्तनपान कराएँ।
सबसे महत्वपूर्ण बात
यदि डॉक्टर ने दोबारा बिलीरुबिन की जाँच या फॉलो-अप के लिए बुलाया है, तो यह सोचकर बिल्कुल न जाएँ कि "हमने धूप दिखा दी है, अब जाँच की ज़रूरत नहीं है।"
याद रखिए—धूप सहायक हो सकती है, लेकिन इलाज का विकल्प नहीं। यदि बिलीरुबिन बढ़ रहा है, तो उसका सही उपचार केवल डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही होगा।
माता-पिता क्या करें?
यदि—
पीलिया पहले 24 घंटे में दिखाई दे,
बच्चा दूध कम पी रहा हो,
बहुत सुस्त हो,
बार-बार तेज आवाज में रो रहा हो,
दौरे आएँ,
या पूरा शरीर गहरा पीला हो जाए,
तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
घर पर केवल धूप दिखाना पर्याप्त इलाज नहीं है।
आज के समय में सीरम बिलीरुबिन या ट्रांसक्यूटेनियस बिलीरुबिन की जांच और डॉक्टर की सलाह ही सही तरीका है।
अंत में एक जरूरी संदेश
नवजात पीलिया बहुत सामान्य है।
अधिकांश बच्चों में यह अपने आप या फोटोथेरेपी से ठीक हो जाता है।
लेकिन समय पर पहचान और सही इलाज बेहद जरूरी है, क्योंकि बहुत अधिक बिलीरुबिन बच्चे के मस्तिष्क को नुकसान पहुँचा सकता है।
इसलिए डरिए मत, लेकिन लक्षणों को नज़रअंदाज़ भी मत कीजिए।
अगर यह जानकारी आपको उपयोगी लगी हो, तो इसे उन माता-पिता तक जरूर पहुँचाइए जिनके घर नया मेहमान आया है।
note: अगर आपके मन में और भी कुछ सवाल हैं या सुझाव है, तो मुझसे साझा कीजिए, मैं उन्हें सम्मिलित करने की कोशिश करूँगा.
References:
American Academy of Pediatrics. Clinical Practice Guideline: Management of Hyperbilirubinemia in the Newborn Infant 35 or More Weeks of Gestation. Pediatrics. 2022.
World Health Organization (WHO). Newborn Health and Neonatal Care Guidelines.
National Institute for Health and Care Excellence (NICE). Jaundice in Newborn Babies Under 28 Days (Clinical Guideline CG98).
National Center for Biotechnology Information (NCBI Bookshelf). Neonatal Jaundice – StatPearls Publishing.
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