बच्चों में खांसी: हर खांसी में दवा जरूरी नहीं

वैज्ञानिक पहलू, कारण, प्रकार और इलाज

Dr. Anand Nagdeve

8/18/20262 min read

भारत में बहुत से लोग पढ़े-लिखे हैं, लेकिन जब बात हमारे शरीर की Anatomy, Physiology और बीमारियों के वैज्ञानिक कारणों को समझने की आती है, तो आम लोगों के लिए सरल भाषा में जानकारी बहुत कम मिलती है।

मेडिकल साइंस की ज्यादातर अच्छी और विस्तृत जानकारी अंग्रेजी में है, जो मुख्य रूप से डॉक्टरों और मेडिकल professionals के लिए लिखी गई है। इसलिए एक सामान्य व्यक्ति के लिए अपने शरीर और बीमारी के पीछे का विज्ञान समझना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।

इसी कमी को पूरा करने की एक छोटी-सी कोशिश है ये ब्लॉग।

मेरा उद्देश्य सिर्फ यह बताना नहीं है कि बीमारी में “क्या दवा लें”, बल्कि यह समझाना है कि बीमारी होती क्यों है, शरीर में क्या बदलाव होते हैं और उसके पीछे का विज्ञान क्या है।

मैं कोशिश करता हूँ कि मेडिकल साइंस की कठिन बातों को बहुत आसान और सामान्य भाषा में, बिना वैज्ञानिक तथ्यों से समझौता किए, आप तक पहुँचाया जाए।

क्योंकि मेरा मानना है—

“अपने शरीर और बीमारी को समझना भी स्वास्थ्य की देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।”

इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए आज हम बच्चों में खाँसी से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों, उसके कारणों और उसके अलग-अलग पहलुओं को आसान भाषा में समझेंगे।

बच्चे को खांसी आते ही ज्यादातर parents के मन में पहला सवाल आता है—“डॉक्टर साहब, कौन-सी cough syrup दें?”

लेकिन असल में पहला सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “कौन-सी दवा दें?”

पहला सवाल होना चाहिए—

“बच्चे को खांसी क्यों हो रही है?”

क्योंकि खांसी खुद कोई बीमारी नहीं है। खांसी शरीर का एक protective mechanism है। इसका काम airway यानी सांस की नली को साफ रखना है। जब गले या सांस की नली में mucus, धूल, कोई irritant या infection होता है, तो शरीर खांसी के माध्यम से उसे बाहर निकालने की कोशिश करता है। खांसी शरीर का अपना “cleaning system” है।

इसलिए कई बार खांसी को पूरी तरह बंद करना भी सही approach नहीं होता।

बच्चों में खांसी क्यों होती है?

बच्चों में खांसी के बहुत सारे कारण हो सकते हैं। लेकिन practical तौर पर parents के लिए इन्हें कुछ मुख्य groups में समझना आसान है।

सबसे common कारण—Viral infection

बच्चों में acute cough का सबसे common कारण viral upper respiratory infection, यानी सामान्य सर्दी-जुकाम है।

इसके अलावा खांसी इन कारणों से भी हो सकती है:

  • Common cold

  • Influenza जैसे viral infections

  • Bronchiolitis

  • Croup

  • Pneumonia

  • Asthma

  • Allergy

  • Post-nasal drip

  • धूल, धुआं या air pollution

  • Passive smoking

  • Whooping cough

  • कुछ बच्चों में recurrent या chronic cough के दूसरे कारण

इसलिए सिर्फ “खांसी है” सुनकर बीमारी का नाम तय नहीं किया जा सकता।

खांसी कैसी है, कितने दिन से है और उसके साथ और क्या symptoms हैं—यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।

खांसी कितने प्रकार की होती है?

खांसी को अलग-अलग तरीके से classify किया जा सकता है।

Parents के लिए सबसे useful classification है:

① Dry cough — सूखी खांसी

इसमें mucus या बलगम बहुत कम होता है।

बच्चा बार-बार “खों-खों” कर सकता है।

यह viral infection के शुरुआती दिनों में, throat irritation में, allergy में या asthma जैसी स्थितियों में हो सकती है।

② Wet / Productive cough — बलगम वाली खांसी

इसमें airway में mucus या secretion ज्यादा होता है।

बच्चा खांसकर उस mucus को बाहर निकालने की कोशिश करता है।

यहाँ एक महत्वपूर्ण बात है—

बलगम वाली खांसी को सिर्फ इसलिए दबाना जरूरी नहीं है कि बच्चे को खांसी आ रही है।

क्योंकि कई बार यही खांसी mucus को airway से बाहर निकालने में मदद करती है।

③ Barking cough — भौंकने जैसी खांसी

अगर खांसी की आवाज कुत्ते के भौंकने जैसी लगे, तो croup जैसी स्थिति हो सकती है।

इसके साथ कभी-कभी सांस लेते समय आवाज भी आ सकती है।

ऐसी स्थिति में बच्चे की breathing को ध्यान से देखना जरूरी है।

④ Whooping type cough

कुछ बच्चों में लगातार कई coughs के बाद जोर से सांस अंदर लेने पर विशेष प्रकार की आवाज आ सकती है।

यह pertussis (whooping cough) में देखा जा सकता है।

खासकर अगर खांसी लंबे समय तक चल रही हो या coughing bouts बहुत ज्यादा हों, तो pediatric evaluation जरूरी है।

⑤ रात में ज्यादा होने वाली खांसी

अगर बच्चा बार-बार रात में खांसता है, तो सिर्फ “सर्दी” मान लेना सही नहीं है।

अगर यह बार-बार हो रहा है, exercise या running से बढ़ता है, या wheezing के साथ है, तो asthma सहित दूसरे कारणों पर विचार करना पड़ सकता है।

डॉक्टर स्टेथोस्कोप से बच्चे की छाती में क्या सुनते हैं?

डॉक्टर मुख्यतः ये चीजें सुनते हैं:

1. Air entry कैसी है?
दोनों फेफड़ों में हवा बराबर और अच्छी तरह जा रही है या किसी हिस्से में कम जा रही है।
अगर एक तरफ air entry कम हो, तो pneumonia, collapse, pleural fluid या foreign body जैसी स्थितियों के बारे में सोचा जा सकता है।

2. Wheezing है या नहीं
सांस छोड़ते समय सीटी जैसी आवाज सुनाई दे तो यह airway narrowing का संकेत हो सकता है। यह asthma या viral-induced wheeze जैसी स्थितियों में मिल सकती है।

3. Crepitations / Crackles हैं या नहीं
छोटी-छोटी चटकने जैसी आवाजें सुनाई दे सकती हैं। ये alveoli या छोटे airways में fluid/secretions या कुछ अन्य pathological processes से जुड़ी हो सकती हैं। Clinical context के साथ इनका महत्व तय होता है।

4. Bronchial breathing तो नहीं
सामान्य फेफड़े में सांस की आवाज relatively soft होती है। अगर किसी हिस्से में bronchial-type breathing सुनाई दे, तो lung consolidation जैसे findings की संभावना बढ़ सकती है।

5. Stridor है या नहीं
यह खास तौर पर सांस अंदर लेते समय आने वाली तेज, harsh आवाज होती है। यह अक्सर upper airway obstruction की ओर संकेत करती है, जैसे croup में।

लेकिन एक बहुत महत्वपूर्ण बात

सिर्फ स्टेथोस्कोप से pneumonia या asthma का diagnosis नहीं होता।

Doctor साथ में यह भी देखते हैं:

  • बच्चा कितनी तेजी से सांस ले रहा है

  • chest अंदर खिंच रहा है या नहीं

  • oxygen saturation

  • बुखार

  • बच्चा कितना active है

  • feeding कैसी है

  • खाँसी कितने दिनों से है

  • नाक बहना, wheezing या अन्य symptoms हैं या नहीं

इसलिए जब pediatrician बच्चे की chest सुनता है, तो असल में वह “खाँसी की आवाज” नहीं बल्कि respiratory system की functioning और abnormal breath sounds को assess कर रहा होता है।

क्या हर खांसी में cough syrup देना चाहिए?

नहीं।

यह सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है।

अगर बच्चा:

  • सामान्य रूप से सांस ले रहा है,

  • पानी/दूध ले रहा है,

  • खाना खा रहा है,

  • खेल रहा है या सामान्य activity कर रहा है,

  • बहुत ज्यादा सुस्त नहीं है,

  • wheezing या breathing difficulty नहीं है,

तो साधारण viral cough में अक्सर supportive care ही पर्याप्त होती है।

हर खांसी में cough syrup देना जरूरी नहीं है।

और छोटे बच्चों में कई over-the-counter cough और cold preparations नुकसान भी कर सकते हैं। कुछ products में एक से ज्यादा medicines होती हैं, जिससे accidental overdose का खतरा बढ़ सकता है।

इसलिए—

“खांसी है = cough syrup” यह equation सही नहीं है।

खांसी के साथ बुखार आ जाए तो क्या करें?

यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात है—

सिर्फ बुखार का नंबर देखकर बीमारी का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए।

देखना यह है कि बच्चा कैसा है।

क्या बच्चा:

  • पानी/दूध पी रहा है?

  • सामान्य तरीके से सांस ले रहा है?

  • बहुत सुस्त तो नहीं?

  • बार-बार उल्टी तो नहीं कर रहा?

  • पेशाब सामान्य आ रहा है?

  • सांस लेने में मेहनत तो नहीं हो रही?

Viral cold में भी fever हो सकता है।

लेकिन खांसी + बुखार + तेज या कठिन सांस एक अलग situation है और pneumonia जैसी बीमारी को rule out करना जरूरी हो सकता है।

cough के साथ breathing rate, chest indrawing, stridor और general danger signs को विशेष महत्व दिया जाता है।

क्या खांसी और बुखार होने पर antibiotic देना चाहिए?

हर बार बिल्कुल नहीं।

बच्चों में acute cough का बड़ा हिस्सा viral infection के कारण होता है।

Common cold में antibiotics बीमारी को जल्दी ठीक नहीं करते और सामान्य viral cough में routine antibiotic की जरूरत नहीं होती।

इसलिए antibiotic का सवाल तब आता है जब examination और clinical findings से bacterial infection या pneumonia जैसी स्थिति का suspicion हो।

यानी—

Antibiotic खांसी की दवा नहीं है।

खांसी कितने दिनों में ठीक हो जानी चाहिए?

यह सवाल parents सबसे ज्यादा पूछते हैं।

अगर सामान्य viral respiratory infection की बात करें तो cold के symptoms अक्सर 1–2 सप्ताह में काफी बेहतर हो जाते हैं।

लेकिन खांसी उससे ज्यादा समय तक रह सकती है।

Acute cough को पूरी तरह ठीक होने में 2-3 सप्ताह तक लग सकते हैं।

इसलिए केवल यह देखकर कि—

“10 दिन हो गए और अभी भी खांसी है”

यह जरूरी नहीं कि बच्चे को antibiotic की जरूरत है।

लेकिन अगर खांसी लगातार बनी हुई है, बढ़ रही है या बार-बार लौट रही है, तो कारण तलाशना जरूरी है।

कब खांसी चिंता का विषय है?

यह section parents को जरूर ध्यान से पढ़ना चाहिए।

खांसी से ज्यादा important है कि बच्चा सांस कैसे ले रहा है।

तुरंत medical assessment की जरूरत हो सकती है अगर:

  • सांस लेने में बहुत परेशानी हो

  • बच्चा बहुत तेज सांस ले रहा हो

  • सांस लेते समय chest अंदर खिंच रहा हो

  • बच्चा बोल/रो/पी न पा रहा हो क्योंकि सांस फूल रही हो

  • होंठ या चेहरा नीला पड़ रहा हो

  • बच्चा बहुत ज्यादा सुस्त या बेहोशी जैसा हो

  • लगातार worsening हो रही हो

  • गंभीर wheezing या stridor हो

  • बच्चा बहुत ज्यादा unwell दिख रहा हो

WHO के childhood respiratory assessment में fast breathing, chest indrawing, stridor और danger signs को गंभीर respiratory illness की पहचान में महत्वपूर्ण माना गया है।

कब लंबे समय की खांसी की जांच करवानी चाहिए?

अगर खांसी 3–4 सप्ताह से ज्यादा बनी हुई है, तो इसे केवल “पुरानी सर्दी” मानकर छोड़ना सही नहीं है।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर बच्चे की history और examination के आधार पर अलग-अलग कारणों के बारे में सोच सकते हैं|

क्या खांसी को सिर्फ आवाज से diagnose किया जा सकता ?

नहीं...

Parents अक्सर कहते हैं—

“खांसी सूखी है, इसलिए dry cough की medicine चाहिए।”

लेकिन diagnosis इतना simple नहीं है।

Doctor को यह देखना पड़ता है:

खांसी कब शुरू हुई?
कितने दिन से है?
बुखार है या नहीं?
नाक बह रही है या नहीं?
सांस तेज है या नहीं?
wheezing है या नहीं?
रात में ज्यादा होती है या नहीं?
दौड़ने पर बढ़ती है या नहीं?
बच्चा खाना-पीना कैसा कर रहा है?
बच्चे का general condition कैसा है?

इन सबको मिलाकर diagnosis बनता है।

क्या खिलाएँ?

  • गुनगुने तरल पदार्थ – पानी, दाल का पतला पानी, सूप आदि।

  • नरम और आसानी से निगलने वाला भोजन – खिचड़ी, दलिया, दाल-चावल, नरम सब्जियाँ।

  • फल और सब्जियाँ – उम्र के अनुसार सामान्य मात्रा में।

  • बच्चा दूध पीता है तो दूध बंद करने की जरूरत नहीं है

  • छोटे बच्चों में एक बार में बहुत ज्यादा खिलाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा और बार-बार देना उपयोगी हो सकता है, खासकर अगर तेज खाँसी से उल्टी हो जाती हो।

  • 1 साल से बड़े बच्चों में शहद खाँसी को कुछ हद तक शांत कर सकता है। लेकिन 1 साल से कम उम्र के बच्चे को शहद बिल्कुल न दें, क्योंकि infant botulism का जोखिम रहता है।

किन चीजों से बचें?

खाँसी में ऐसी कोई वैज्ञानिक सूची नहीं है कि दूध, दही, केला या ठंडा पानी हर बच्चे में खाँसी बढ़ाता है। इसलिए केवल खाँसी होने के कारण इन्हें सामान्यतः बंद करने की जरूरत नहीं है।

लेकिन:

  • बहुत तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन, अगर उससे गले में जलन या खाँसी बढ़ती हो, तो कम करें।

  • बहुत मीठे पेय, कोल्ड ड्रिंक और packaged sugary drinks से बचना बेहतर है।

  • छोटे बच्चों को बहुत कठोर या choking-risk वाले foods न दें; भोजन उम्र के अनुसार नरम और छोटे टुकड़ों में दें।

  • बहुत गरम भोजन/पेय न दें, खासकर छोटे बच्चों को।

Parents के लिए सबसे आसान तरीका

जब बच्चे को खांसी हो, तो घर पर सबसे पहले ये 5 बातें देखें:

1. बच्चा कैसा दिख रहा है?

Active है या बहुत सुस्त?

2. सांस कैसी है?

Normal है या तेज/मुश्किल?

3. बच्चा पी पा रहा है?

Breastfeed, milk या fluids ले रहा है?

4. बुखार है?

और अगर है तो बच्चा fever के बीच कैसा behave कर रहा है?

5. खांसी कितने दिनों से है?

और समय के साथ बेहतर हो रही है या बदतर?

इन पांच सवालों से parents को situation समझने में बहुत मदद मिल सकती है।

सबसे बड़ी गलती क्या होती है?

बच्चे को खांसी हुई नहीं कि घर में पहले से रखी हुई कोई cough syrup शुरू कर देना।

कई cough-and-cold medicines में multiple ingredients होते हैं और छोटे बच्चों में इनसे side effects या dosing errors हो सकते हैं।

इसलिए किसी भी cough syrup को सिर्फ इसलिए नहीं देना चाहिए कि वह “बच्चों वाली” है।

बच्चों में दवा उम्र और वजन के हिसाब से ही दी जानी चाहिए और कई medicines की जरूरत ही नहीं होती।

निष्कर्ष:

बच्चे को खांसी होना हमेशा बीमारी की गंभीरता का संकेत नहीं है।

कई बार खांसी शरीर की natural defence mechanism होती है।

अगर बच्चे को साधारण cold है, वह ठीक से सांस ले रहा है, पानी/दूध ले रहा है, बहुत सुस्त नहीं है और धीरे-धीरे symptoms बेहतर हो रहे हैं, तो अक्सर समय और supportive care ही सबसे अच्छा इलाज होता है।

लेकिन अगर—

खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी हो, chest अंदर खिंचे, बच्चा बहुत सुस्त हो, पानी/दूध न पी पाए, होंठ नीले पड़ें, या खांसी लगातार बढ़ती जाए—तो cough syrup के बारे में सोचने से पहले बच्चे की medical evaluation जरूरी है।

और सबसे महत्वपूर्ण बात—

हर खांसी को बंद करना जरूरी नहीं है।


यही बच्चों की खांसी को समझने का वैज्ञानिक तरीका है।

खांसी की आवाज सुनकर नहीं, बच्चे को देखकर और सांस को देखकर तय करना चाहिए कि बच्चे को सिर्फ supportive care चाहिए या medical evaluation।

नोट: यह जानकारी parents को सामान्य समझ देने के लिए है। बहुत छोटे बच्चों, सांस की तकलीफ, लगातार तेज बुखार, recurrent/chronic cough या किसी गंभीर underlying बीमारी वाले बच्चे में pediatrician की जांच जरूरी है।इस ब्लॉग को लिखने का मुख्य उद्देश्य पेरेंट्स के मन में बच्चों की खाँसी को लेकर मौजूद भ्रम और गलत धारणाओं को दूर करना और उन्हें खाँसी से जुड़े वास्तविक तथ्यों तथा उसके वैज्ञानिक पहलुओं को सरल भाषा में समझाना है।

संदर्भ (References)

  1. World Health Organization (WHO)Childhood Cough & Respiratory Infections Guidelines

  2. NICE (National Institute for Health and Care Excellence)Cough (Acute): Antimicrobial Prescribing

  3. American Academy of Pediatrics (AAP)HealthyChildren.org: Coughs and Colds in Children

  4. Centers for Disease Control and Prevention (CDC)Respiratory Infections & Childhood Health

  5. U.S. Food & Drug Administration (FDA)Children’s Cough and Cold Medicines: Safety Information

  6. Nelson Textbook of Pediatrics — Standard Pediatric Reference

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